पुराण न तो गलत होते हैं उसमें विश्लेषण कमि से मनुष्य अनर्थ कर लेता हैं इस लेख का उद्देश्य पुराण का सही विश्लेषण हैं अगर कोई धार्मिक व्यक्ति को हमारे कार्य अच्छा लगा हैं तो इसे शेर और लायक जरूर करें इस ब्लॉग को सब्सक्राइब करें धन्यवाद गणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ध्यानं नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्। देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत्॥ अर्थ : द्विपदा गायत्री महापुरुष महानारयण जो सब मनुष्य में आत्मारूपी नरोत्तम एवं सरस्वती देवी जो बुद्धि वाक् एवं जिह्वासंधन करण रूपिणि मां सरस्वती का मायारूप का नारायण भगवान को नामस्कार करते हुए एवं उसके सरस्वती रूप की मायरुप तथा इस सकन्ध पुराण प्रोक्ता व्यास महार्षी को नमस्कार हैं। अथ पद्मपुराणे महेश्वरखण्डस्य प्रथमोध्याय यस्याज्ञाय जगतस्त्रष्टा विरिंचिः पलको हरिः । संहर्ता कालरूद्राख्यो नमस्तस्मै पिनाकिने ॥१॥ अर्थ:- सब देवताओं के मूल शक्तिस्वरूप पिनाकी धनुष धारि महारूद्र जिसके इच्छा रूपि बंधन के वषिभूत होकर विरिंचि (ब्रह्म) जिसके आज्ञा से सृष्टि करते हैं विष्णु उसके पालन करते हैं।तथा कालरुद्र संहार करते हैं ऐसे अद्भुत शाक्ति स्वरूप भगवान मह...