नास्तिक का पर्दफास सब नास्तिक अपने विज्ञान के किताबी ज्ञान से हर विषय में विज्ञान देखने की कोशिश करते हैं मुर्खों को ये नहीं पता हैं विज्ञान भी धर्म से ही निकाला हैं अगर यहां विज्ञान में भौतिक विज्ञान की बात हो रहा हैं तो धर्म ग्रंथों में पराभौतिक की बात करते हैं लेकिन समझने का प्रयास नहीं करते हैं। बस बीना पैरों शीरों वाली बात करते हैं । विज्ञान का निपटा अंधो को धर्म ग्रंथों विज्ञान नहीं दिखते आज बृहदारण्यक उपनिषद् में विज्ञान की बात करेंगे आप खुद निर्णय करें क्या ये सब विज्ञान की बात गलत हैं। एवं वै भूतानां पृथिवी रसः पृथिव्या आपो अपामोषधय ओषधीनां पुष्पाणि पुष्पाणां फलानि फलानां पुरुषः पुरुषस्य रेतः॥१॥ भाष्य: एषां वै भूतानां च भूतिप्राणिनां पृथिवी रसः प्रदानं यद तत्वादयो मनुष्य शरीरस्य मधुवत सारभूतं अथ तस्य पृथिव्या आपो रसः आपो वा रसः औषुधयः (सुख करं अन्नं) इत्यर्थः औषुधीनां रसःपुष्पं पुष्पाणां फलानि रसाणी तैः पुष्पाफलादिनां रसदैव पुरूषः तस्य पुरूषस्य रेतः वृर्द्धिभवति इत्यर्थः अनुवादः इन सब भूतप्राणियों में पृथ्वी रस प्रदान होता हैं अर्थात पृथ्वी तत्त्व ही प्रदान होता हैं इसलिए पृथ्...